रात यूं दिल में तेरी खोई हुई याद आई

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यहां जो प्लेयर है उस पर शुरू में आप सुनेंगे फ़ैज़ साहब की आवाज़ में नक्श-ए-फ़रियादी से पांच नज़्में और कुछ इब्तेदाई अशआर-
1.रात यूं दिल में तेरी खोई हुई याद आई
2.फिर कोई आया दिल-ए-ज़ार नहीं कोई नहीं
3.चंद रोज़ और मेरी जान
4.बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे
5.मौज़ू-ए-सुख़न
6.हम लोग

इस पेशकश के आख़ीर में आप नूरजहां से सुनेंगे...मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग
ये पाकिस्तान में बनी फ़िल्म क़ैदी (1962) से लिया गया है. इसे देखते हुए सुनने के लिये यहां जाएं.








 
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pramod ranjan - September 7, 2007 at 12:21 PM

साधुवाद स्‍वीकारें रेयाज भाई, फैज की सभी रचनाएं नेट पर उपलब्‍ध करवा सकें तो यह एक महत्‍वपूर्ण काम होगा ।

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