ऐ गमे दोस्त ! तू कहां है आज
Written by Reyaz-ul-haque on Saturday, September 01, 2007दिल रहीने गमे जहां है आज
हर नफ़स तिश्ना-ए-फ़ुगां है आज
सख्त वीरां है महफ़िले-हस्ती
ऐ गमे दोस्त ! तू कहां है आज.
-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
यही दाग थे जो सजा के हम सरे-बज़्मे-यार चले गये (अभी यह ब्लॉग टेस्ट की प्रक्रिया में है.)
दिल रहीने गमे जहां है आज
हर नफ़स तिश्ना-ए-फ़ुगां है आज
सख्त वीरां है महफ़िले-हस्ती
ऐ गमे दोस्त ! तू कहां है आज.
-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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