यही दाग थे जो सजा के हम सरे-बज़्मे-यार चले गये (अभी यह ब्लॉग टेस्ट की प्रक्रिया में है.)
बेगम अख्तर की आवाज़ में फ़ैज़ की एक खूबसूरत गज़ल -आये कुछ अब्र कुछ शराब आये.
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